चुनौती:
यूँ तो उसके जीवन में कई चुनौतियां थीं जैसे की उसका गोरा बेदाग रंग, बढ़ती उम्र, एक छोटा भाई, गरीबी और शेरा। एक लड़की के लिए सुंदर होना तारीफ की बात है लेकिन कमली के लिए यही उसका सबसे बड़ा अभिशाप बन चुका था। बचपन में ही माँ बाप के गुजर जाने के बाद चाचा चाची ने दोनो मासूमों को घर से निकाल दिया। रोते बिलखते दोनो बच्चे किसी रेलगाड़ी में चढ़ गए और इलाहाबाद के एक गाँव में जा पहुँचे। किसी दयावान का सहारा मिला और दोनो बच्चों को दो वक्त की रोटी और सर पे छत।
यूँ तो उसके जीवन में कई चुनौतियां थीं जैसे की उसका गोरा बेदाग रंग, बढ़ती उम्र, एक छोटा भाई, गरीबी और शेरा। एक लड़की के लिए सुंदर होना तारीफ की बात है लेकिन कमली के लिए यही उसका सबसे बड़ा अभिशाप बन चुका था। बचपन में ही माँ बाप के गुजर जाने के बाद चाचा चाची ने दोनो मासूमों को घर से निकाल दिया। रोते बिलखते दोनो बच्चे किसी रेलगाड़ी में चढ़ गए और इलाहाबाद के एक गाँव में जा पहुँचे। किसी दयावान का सहारा मिला और दोनो बच्चों को दो वक्त की रोटी और सर पे छत।
कमली जैसे ही समझने लायक हुई उसने गांव में औरों के घर भी काम शुरू कर दिया और अपने भाई को लेकर अलग रहने लगी। बचपन से लेकर आज तक उसने सुख की एक भी रात नही देखी थी वक्त के द्वारा दी जाने वाली चुनौतियों से लड़ते हुए एक वीरांगना सी चमक उसके चेहरे पर दिखने लगी थी यह चमक उसके सौंदर्य में चार चाँद लगा देती थी। पूरा गांव कमली को पसंद करता था लेकिन शेरा उसे परेशान करने का कोई मौका नही छोड़ता था, और वह बड़ा दिल करके उसे माफ कर देती थी इस कारण उसकी बदतमीजियां बढ़ती जा रहीं थी। शेरा कमली की चुप्पी को उसकी कमजोरी समझने लगा था। आज फिर उसने कमली का रास्ता रोका और फिर बदतमीजी करने लगा लेकिन आज कमली का धैर्य जवाब दे गया, उसने आव देखा न ताव जोर से एक झन्नाटेदार थप्पड़ शेरा के गाल पर दे मारा। शेरा गाल में हाथ लगाकर देखता रह गया और कमली एक विजयी मुस्कान के साथ आगे बढ़ गई। उसने अपने जीवन की एक और चुनौती को जीत लिया था।डॉ. आशु जैन 20/11/18
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