Friday, November 23, 2018

नयापन


अब तक बड़ी
अनछुई सी थी मैं
छुईमुई सी थी मैं
तुमने मुझे छूकर
नया रंग भर दिया
नए अहसासों को
जीवंत कर दिया
मैं रोज वही
पुरानी सी थी
आज कुछ नई हूँ
तुम्हारा साथ पाकर
खिल सी गई हूँ
ये *नयापन* अब
जीवन है मेरा
हर रोज मैं नई हूँ
जब तक साथ है तेरा
जीवन में हर रंग
भरती रहूंगी
तुझसे मोहब्बत
मैं करती रहूंगी।
तू चाहे या नहीं
या तू या कुछ नहीं
बस हम दोनों हैं, सब
और सब, कुछ भी नहीं।

डॉ. आशु जैन 21/11/18

No comments:

Post a Comment

स्वाभिमान - लघुकथा

मन बड़ा आहत है जब से मीता ने रमेश को कहते सुना अरे मेरी बीवी किसी काम की नहीं। बस खाना बनाती है और सारा दिन पड़ी रहती है। पढ़ी लिखी है लेकिन न...