अब तक बड़ी
अनछुई सी थी मैं
छुईमुई सी थी मैं
तुमने मुझे छूकर
नया रंग भर दिया
नए अहसासों को
जीवंत कर दिया
मैं रोज वही
पुरानी सी थी
आज कुछ नई हूँ
तुम्हारा साथ पाकर
खिल सी गई हूँ
ये *नयापन* अब
जीवन है मेरा
हर रोज मैं नई हूँ
जब तक साथ है तेरा
जीवन में हर रंग
भरती रहूंगी
तुझसे मोहब्बत
मैं करती रहूंगी।
तू चाहे या नहीं
या तू या कुछ नहीं
बस हम दोनों हैं, सब
और सब, कुछ भी नहीं।
डॉ. आशु जैन 21/11/18
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