सहज, सरल, सम्यक छविधारी
कलयुग के वो बाल ब्रम्हचारी,
जन्म लिया शरद पूर्णिमा को,
नर रूप में ईश्वर के वे हैं अवतारी।
जन्म लेने के एक वर्ष में
हुआ था भारत देश आजाद,
यही इसी दिन हुआ जहाँ में
अहिंसा और दया का शंखनाद।
तप करते हैं ,ध्यान में जीते
ज्ञान भरा पर पाप से रीते,
यही प्रार्थना आपसे गुरुवर
उम्र आपके चरणों में बीते।
हमने प्रभु को नही है देखा
पर तुममें छवि जिन पाई है
आज अवतरित हुए गुरु मेरे
खुशियां ही खुशियां छाई हैं।
पूज्य गुरुवर के चरणों में बारम्बार नमन
डॉ. आशु जैन 24/10/18
कलयुग के वो बाल ब्रम्हचारी,
जन्म लिया शरद पूर्णिमा को,
नर रूप में ईश्वर के वे हैं अवतारी।
जन्म लेने के एक वर्ष में
हुआ था भारत देश आजाद,
यही इसी दिन हुआ जहाँ में
अहिंसा और दया का शंखनाद।
तप करते हैं ,ध्यान में जीते
ज्ञान भरा पर पाप से रीते,
यही प्रार्थना आपसे गुरुवर
उम्र आपके चरणों में बीते।
हमने प्रभु को नही है देखा
पर तुममें छवि जिन पाई है
आज अवतरित हुए गुरु मेरे
खुशियां ही खुशियां छाई हैं।
पूज्य गुरुवर के चरणों में बारम्बार नमन
डॉ. आशु जैन 24/10/18
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